पर्सनल लोन लेते वक़्त किन बातों का रखें ध्यान?

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दोस्तों आपने कई बार अपने नजदीकियों को अपने बिजनेस के लिए बिजनेस लोन, पढ़ाई के खर्चो के लिए एज्यूकेशनल लोन, घर खरीदने के लिए होम लोन लेते हुए सुना ही होगा, जिसकी वजह भी इनके नाम के साथ ही साफ नजर आती है। लेकिन क्या आपने कभी पर्सनल लोन के बारे में सुना है। आज हम आपको बताएंगे कि पर्सनल लोन होता क्या है और पर्सनल लोन लेते समय आपको किन बातों क्या ध्यान रखना अनिवार्य है। जिससे आगे चलकर आपको परेशानियों का सामना न करना पड़े।

पर्सनल लोन क्या है।

लोन के दो मुख्य विशेष प्रकार होते सुरक्षित लोन और असुरक्षित लोन, जिसे अंग्रेजी में सिक्योर लोन और उनसेक्युरेद लोन भी कहा जाता है। पर्सनल लोन एक तरह से असुरक्षित लोन होता है, जो लोन लेने वाले व्यक्ति की निजी फाइनांशियल जरूरतों को पूरा करने के काम आता है। पर्सनल लोन लेते समय आपको अपनी कोई भी चीज जैसे कि गहने, घर, गाड़ी गिरवी रखने की आवश्यकता नहीं होती है और अपनी आवश्यकतानुसार लोन से मिले हुए पैसों का इस्तेमाल आप कर सकते है। अब सवाल यह है कि, इसका इस्तेमाल आप कहाँ-कहाँ कर सकते है। आपके सारे निजी खर्च जैसे कि, शादी, घर का डेकोरेशन या फर्नीचर, देश-विदेश की यात्राओं के लिए साथ ही आपात कालीन समय पर मेडिकल या बीमारियों के खर्च के लिए भी आप पर्सनल लोन ले सकते है। अगर किसी तरह से आप होम या एज्यूकेशनल लोन के लिए अपात्र साबित होते है, फिर भी आप पर्सनल लोन लेकर अपनी जरूरतें पूरी कर सकते है।

पर्सनल लोन लेते समय इन बातों का ध्यान रखना अनिवार्य है :-

1. बैंक, जिससे आप अपना पर्सनल लोन लेना चाहते है।
आपके मोबाइल या ई-मेल पर किसी बैंक द्वारा आए हुए मैसेज के माध्यम से मिलने वाले लोन प्रस्ताव पर ध्यान न दे। ज्यादातर कुछ बैंक ब्याज दर कम होने का दावा करते हुए नजर आते है, लेकिन असल में लोन लेने के बाद ब्याज दर ज्यादा होने की जानकारी ग्राहकों मिलती है। जिस बैंक में आपका पहले से ही खाता है, ऐसी बैंक सुविधाजनक जरूर साबित होती है। साथ ही अगर आप बाजार में अच्छी तरह से खोज नहीं करते है, तो आप बेहतर सौदे से चूक सकते है।

2. अपनी क्रेडिट रेटिंग जांचे।
अगर आप पर्सनल लोन के लिए अप्लाई करने की सोच रहे है, तो सबसे पहले आपको अपनी क्रेडिट रेटिंग की जांच करनी चाहिए। साथ ही इस बात को भी ध्यान में रखें कि अगर आपकी क्रेडिट रेटिंग अच्छी स्थिति में नहीं है, तो आप को कम दर के लोन की तुलना में ज्यादा दर का अधिक महंगा सौदा पेश किया जा सकता है। जो शायद आपके लिए फायदेमंद साबित न हो।

3. फौजदारी यानी की फोर्सक्लोजर नियमों के बारे में जानकारी प्राप्त करें।
RBI ने बैंकों को लोन पर फौजदारी शुल्क न लेने का निर्देश देने के बाद भी, कुछ बैंक क्रेडिट के अन्य रूप में भी प्री पेनल्टी को आकर्षित करते है। अगर आपके लोन की अवधि 2 से 3 साल से अधिक है और आप उम्मीद करते है कि आने वाले महीनों में आपके नगदी प्रवाह में सुधार होगा, तो आपको कम से कम फौजदारी शुल्क के साथ लेने की सलाह दी जाती है। इसकी वजह यह है, कि अगर आप अपने लोन की अवधि समाप्त होने से पहले लोन को चुकाते है, तो उधार दाताओं से शुल्क प्राप्त किया जाता है।

4. ब्याज दर की कैलक्यूलेशन करें।
किसी भी लोन के प्रकार का सबसे महत्वपूर्ण भाग होता है, इसका ब्याज दर, फिर वह पर्सनल लोन हो या होम लोन। हर एक बैंक में लोन का ब्याज दर एक समान नहीं होता है। जो बैंक सबसे कम ब्याज दर का प्रस्ताव रखती है, जरूरी नहीं है कि आप उसी बैंक से लोन ले। ऐसे प्रस्ताव ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए ही बनाए जाते है। फ्लैट इंटरेस्ट रेट कम ब्याज दर प्राप्त लोन पर ही दिए जाते है, लेकिन इसका यह अर्थ नहीं होता है कि आप कम भुगतान करने जा रहे है। साथ ही लेट पेमेंट फ़ी, प्री पेमेंट फ़ी और प्रोसेसिंग फ़ी भी कैलक्यूलेट करें।

5. सुनिश्चित करें कि आप EMI का इस्तेमाल कर सकते है।
लोन लेने के बाद जब उसे चुकाने की बारी आती है, आपको खुद से ईमानदार रहना आवश्यक है। क्योंकि आपकी चुकौती क्षमता के बारे में आपसे बेहतर कोई भी नहीं जानता सकता है। अगर आपको लगता है, कि आप पर्सनल लोन में EMI सर्विस नहीं दे सकते है, तो आपके लिए पर्सनल लोन न लेना ही उचित सुझाव साबित होता है। वक्त पर EMI न भरने की गलती आपको बाद में नुकसान पहुंचा सकती है।

6. ADD-ON ऑफर्स से दूर ही रहें।
कई बार बैंक पर्सनल लोन लेते समय आपके सामने विशेष बीमा योजनाओं का भी प्रस्ताव रखती है। साथ ही यह दावा भी करते है कि आपको किसी भी प्रकार का भुगतान नहीं करना पड़ेगा। लेकिन आपका बीमा प्रीमियम आपके EMI के साथ जुड़ जाएगा। इस समय ऐसे प्रस्ताव के लिए मना करने में ही समझदारी साबित होती है। पर्सनल लोन लेते समय ऊपर दी गई बातों का ध्यान अवश्य रखें और अपने भविष्य को सुरक्षित रखे।

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